Bhoodas

भूदास से मालिक तक, पीड़ा से वैभव तक

19 जनवरी 2009 को तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की नौवीं जन प्रतिनिधि सभा के दूसरे पूर्णाधिवेशन में लाखों तिब्बती भूदासों के मुक्ति दिवस की स्थापना संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। हर साल 28 मार्च को तिब्बती लाखों भूदासों का मुक्ति दिवस स्थापित किया गया, ताकि तिब्बतियों सहित पूरे चीनी राष्ट्र के लोग हमेशा तिब्बत के विद्रोह को शांत करने के साथ-साथ लोकतांत्रिक सुधार की ऐतिहासिक घटना को याद रख सकें। 28 मार्च 2021 को 12वां तिब्बती लाखों भूदास मुक्ति दिवस है। 1959 में तिब्बती पठार पर एक विश्व-प्रसिद्ध सामाजिक परिवर्तन हुआ कि राजनीति और धर्म के एकीकरण वाली सामंती भूदास व्यवस्था तिब्बत में खत्म हो गयी। तब से, तिब्बत ने अंधकार से प्रकाश की ओर, पिछड़ेपन से प्रगति की ओर, गरीबी से समृद्धि की ओर, निरंकुशता से लोकतंत्र की ओर चलने की महान यात्रा पर कदम रखा।

1959 के लोकतांत्रिक सुधार से पहले, तिब्बत लंबे समय तक भिक्षुओं और रईसों की तानाशाही के कारण राजनीति और धर्म का एकीकरण वाली सामंती भूदास व्यवस्था में जकड़ा हुआ था। तिब्बत में भूदासों के मालिक मुख्य रूप से तीन वर्गों के थे यानी अधिकारी, रईस और उच्चस्तरीय भिक्षु। वे तिब्बत की कुल आबादी में 5 प्रतिशत से भी कम हिस्सा थे, लेकिन तिब्बत की सभी कृषि योग्य भूमि, चारागाह, जंगल, पहाड़ व नदी और अधिकांश पशुधन के मालिक वे ही थे। जबकि तिब्बत की कुल आबादी के 95 प्रतिशत भूदासों को न केवल भारी कर चुकाना पड़ता था, बल्कि साल के दो तिहाई समय में मालिकों के लिए अवैतनिक श्रम भी करना पड़ता था। कोई भोजन नहीं मिलता था और पूरी तरह से व्यक्तिगत स्वतंत्रता भी नहीं थी। मार्च 1959 के अंत में, तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार औपचारिक रूप से शुरू हुआ, जिसने सामंती भूदास मालिक स्वामित्व प्रणाली को पूरी तरह से समाप्त कर दिया और किसानों व चरवाहों की व्यक्तिगत स्वामित्व प्रणाली की स्थापना की गयी। व्यापक किसानों व चरवाहों को ज़मीन और अन्य साधन बांटे गए। हज़ारों वर्षों तक "बात करने वाले गायों और घोड़ों" के रूप में माने जाने वाले भूदास अपनी जंजीरों से मुक्त होकर पहली बार सच्चे अर्थ में "मानव" बने, और अपने भाग्य व तिब्बती समाज के स्वामी बने। 

किसी भी मूल्य के बिना जान से अपनी स्वास्थ्य फ़ाइल की प्राप्ति तक
पुराने तिब्बत में आधुनिक अर्थों में कोई चिकित्सा और स्वास्थ्य संस्थान नहीं था। केवल कुछ छोटे चिकित्सा संस्थान, निजी क्लीनिक और छुटपुट लोक तिब्बती चिकित्सक थे, जो मुख्य रूप से तीन वर्गों के प्रभुओं की सेवा करते थे। लोकतांत्रिक सुधार के बाद, तिब्बत के तेज आर्थिक विकास और तिब्बत के चिकित्सा व स्वास्थ्य उद्योगों में बड़ी राष्ट्रीय सहायता के साथ-साथ तिब्बत में आधुनिक चिकित्सा और स्वास्थ्य प्रणाली धीरे-धीरे स्थापित हुई, जिससे लाखों पूर्व भूदासों को लाभ मिला। आज, तिब्बत में मूल रूप से प्रत्येक काउंटी में स्वास्थ्य सेवा केंद्र है, प्रत्येक कस्बे में चिकित्सालय है, और प्रत्येक गांव में स्वास्थ्य कक्ष है। काउंटी और टाउन की सभी चिकित्सा संस्थाएं एम्बुलेंस, मोबाइल सेवा वाहनों से सुसज्जित हैं। प्रत्येक प्रशासनिक गांव में दो डॉक्टर हैं। कुछ सामान्य बीमारियों का इलाज मौके पर किया जा सकता है। तिब्बती चिकित्सा, पश्चिमी चिकित्सा और चीनी चिकित्सा को एकीकृत करने वाली सार्वजनिक चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में लगातार सुधार हो रहा। तिब्बत के लोगों की स्वास्थ्य फ़ाइल बनाने की दर 98.9 प्रतिशत तक जा पहुंची।

मवेशियों के बाड़ों में रहने से नये खुशहाल घरों तक
पुराने तिब्बत के ग्रामीण व चारागाह क्षेत्रों में ज्यादातर निवास काले टैंट, अंधेरे व नम धूल व स्लेट हाउस थे, यहां तक कि कुछ लोग मवेशियों के बाड़ों में रहते थे। 1950 में, तिब्बत की आबादी 10 लाख थी, जिनमें से 9 लाख के पास कोई घर नहीं था। "छत वाले घर" होना एक सपना था, जो अनगिनत भूदास अपनी जिंदगी में हासिल नहीं कर सकते थे। लोकतांत्रिक सुधार और स्वायत्त प्रदेश की स्थापना के बाद, चीनी जन मुक्ति सेना और जन सरकार की मदद में पूर्व भूदासों ने पहले बैच के मकानों का निर्माण किया। 2006 से तिब्बत ने पूरे क्षेत्र में इतिहास में किसानों और चरवाहों के लिए सबसे बड़ी आवास परियोजना को लागू किया है। 2013 के अंत में पूरे प्रदेश में 4 लाख 60 हजार 3 सौ परिवार के 23 लाख किसान और चरवाहे सुरक्षित, लंबे-चौड़े और प्रकाशमान नए मकानों में रहने लगे।

2 प्रतिशत से 99 प्रतिशत पहुंची शिक्षा दर
पुराने तिब्बत में शिक्षा का अधिकार भिक्षुओं और भूदासों के मालिकों के हाथों में था और सख्त पदानुक्रमित प्रणाली थी। लोहार और कसाई के बच्चों को स्कूल में प्रवेश करने की इजाज़त नहीं थी। पुराने तिब्बत में बच्चों की शिक्षा दर 2 प्रतिशत से भी कम थी और निरक्षरता दर 95 प्रतिशत थी। हाल के वर्षों में, तिब्बत ने शिक्षा को बढ़ाने के लिए बहुत प्रयास किए हैं और बुनियादी शिक्षा के स्तर में लगातार सुधार हुआ है। प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में प्रवेश करने की दर क्रमशः 99.5 प्रतिशत और 99.3 प्रतिशत तक जा पहुंची। 

62 वर्षों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के विशेष देखभाल और भारी समर्थन में तिब्बती पठार ने उन सामाजिक विकास रास्ते को पूरा किया है, हालांकि अन्य स्थानों में ऐसा करने में सैंकडों वर्ष लग जाते। तिब्बत भर में कायाकल्प हुआ है। 2019 के अंत तक, तिब्बत में सभी 74 गरीब ज़िले गरीबी से मुक्त हो गये और सभी 6 लाख 28 हजार पंजीकृत गरीब लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है। ऐतिहासिक रूप से पूर्ण गरीबी का उन्मूलन किया गया। व्यापक लोगों के भौतिक जीवन व मानसिक हालत में बड़ा सुधार हुआ है। ग्रामीण व चारागाह क्षेत्रों में उत्पादन और रहने की स्थिति में भारी परिवर्तन आया। हम तिब्बत में लाखों भूदासों की मुक्ति की खुशियां मनाते हैं, क्योंकि सभी जातीय समूहों के लोगों को इतिहास को हमेशा याद दिलाना चाहते हैं। हमें आज के समय को मूल्यवान समझते हुए बेहतर भविष्य का निर्माण करने का प्रयास करना चाहिए। वे लोग सूर्य की गर्मी को सबसे अच्छे से जानते हैं, जिसने गंभीर सर्दी का अनुभव किया है। स्मरण करना बेहतर ढंग से आगे बढ़ने के लिए ही है।
(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)


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