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फ्रांसीसी अखबार ले मोंडे को माफी मांगनी चाहिए

फ्रांस के प्रसिद्ध अखबार ले मोंडे ने हाल में लेख जारी कर आरोप लगाया कि चीनी मीडिया सीजीटीएन के फ्रांसीसी चैनल ने लॉरेन ब्यूमोंड नाम की एक फ्रांसीसी संवाददाता बनाकर शिनच्यांग में चीन की नीति की प्रशंसा की।

मतलब है कि लॉरेन ब्यूमोंड चीन सरकार की इच्छा के अनुसार रिपोर्टिंग करती हैं। यहां तक कि ले मोंडे को संदेह है कि लॉरेन ब्यूमोंड मौजूद नहीं है, क्योंकि फ्रेंच भाषी पत्रकारों की सूची में वे शामिल नहीं हैं।

लेकिन फ्रांसीसी मीडिया के सर्वेक्षण करने के बाद पता लगा कि लॉरेन ब्यूमोंड न सिर्फ मौजूद हैं, बल्कि फ्रांसीसी न्यूज विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। फ्रांस के एक अन्य अखबार फिगारो ने लॉरेन ब्यूमोंड के साथ साक्षात्कार किया है।

तो लॉरेन ब्यूमोंड का नाम क्यों फ्रेंच भाषी पत्रकारों की सूची में शामिल नहीं हुआ, क्योंकि उन्होंने उपनाम का इस्तेमाल किया। कारण है कि फ्रांस सही रिपोर्टिंग करने वाले संवाददाताओं पर बड़ा राजनीतिक और आर्थिक दबाव डालता है।

लॉरेन ब्यूमोंड सात साल से चीन में रह रही हैं और उन्होंने शिनच्यांग में कुछ समय बिताया। उन्होंने कहा कि शिनच्यांग में नरसंहार का कोई मामला नहीं आया। अपनी सभी बातों की जिम्मेदारी वे खुद उठाती हैं।

ऐसे में फ्रांसीसी अखबार ले मोंडे को माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि संबंधित रिपोर्ट से न सिर्फ पाठकों और सीजीटीएन, बल्कि चीन-फ्रांस मित्रता को भी नुकसान पहुंचा है।
(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)


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