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दैनिक सवेरा ने कही वो बात जो कृषि मंत्री ने कही, किसान ठोस तथ्यों के आधार पर कृषि कानून में संशोधन करवायें: हरप्रीत सिंह

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को एक वीडियो ट्वीट कर खुले मन से किसानों को संदेश दिया कि भारत सरकार किसानों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। कानूनों को वापस लेने की मांग को छोड़कर कानूनों के किसी भी प्रावधान पर यदि कोई भी किसान संगठन बातचीत करना चाहता है तो वह आधी रात को भी बातचीत के लिए तैयार हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के इस महत्वपूर्ण बयान के बाद अब यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि सरकार किसी हालत में आंदोलन के दबाव में कानूनों को वापस नहीं लेगी। सात माह पूरे होने वाले हैं, दिल्ली की सीमाओं पर किसानों ने घेरा डाला हुआ है। केंद्र के साथ 11 दौर की बातचीत में एक बार भी किसान नेताओं ने ठोस तथ्यों के आधार पर यह नहीं बताया कि नए कृषि कानूनों के किस प्रावधान में क्या कमी है या उसमें क्या संशोधन होने चाहिए। वे नए कानूनों के जरिए किसानों की जमीन जाने का शोर मचा रहे हैं, मगर कानूनों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

नए कृषि कानूनों का एक साल पूरे होने और किसान आंदोलन के 6 माह होने पर पंजाब में सबसे ज्यादा बिकने वाली अखबार दैनिक सवेरा टाइम्स, सवेरा टीवी, सवेरा वैब व ऐप्प और हलचल चैनल ने इन कानूनों के प्रावधानों का अध्ययन विशेषज्ञों के द्वारा करवाया। कुछ प्रगतिशील किसानों और कृषि विशेषज्ञों प्रो. एसएस जाैहल, डॉ. जयंतीलाल भंडारी, खेती करने वाले चार्टर्ड अकाउंटैंट हरप्रीत सिंह आदि के विचार भी बताए। दैनिक सवेरा टाइम्स आपको यही सुझाव देती आई है जो कृषि मंत्री तोमरजी ने दिया है कि कानून रद्द नहीं होंगे। आपको ये बार-बार चेताया जा रहा है कि कानून बिल्कुल ठीक हैं, उनमें आपको कुछ संशोधन करवाने हैं तो आप करवाएं। सरकार के दरवाजे खुले हैं। सरकार ने आपको इज्जत-मान देकर डेढ़ साल के लिए कानूनों को आगे बढ़ाने के लिए कहा और फिर ठोस तथ्यों पर बातचीत के आधार पर संशोधनों का समय दिया था। दिल्ली बार्डर के रास्ते रोककर आप 7 माह से लोगों की सिरदर्दी बने हुए हो। जब आपके लीडर साहिबान दैनिक सवेरा अखबार में आए थे तो चीफ एडीटर श्री शीतल विज ने भी सुझाव दिया था कि कानूनों में जो बात उचित नहीं लगती है, बातचीत से उसमें बदलाव करवा लीजिए। आखिर बातचीत के अलावा कोई हल नहीं है।

इस बारे में दैनिक सवेरा ने हर रोज आर्टिकल देकर और हलचल चैनल ने डिबेट करवाकर आपको विशेषज्ञों के विचारों से हर फायदे-नुक्सान के बारे अवगत कराया। किंतु आपने हमारी अखबारें जलाईं, हमारे खिलाफ रोष धरना दिया, आपने धमकी दी कि आपके पुतले फूंकेंगे। आपने सात माह से रास्ते जाम कर आम पब्लिक को तंग कर रखा है। धरने के कारण दो-दो घंटे ज्यादा लगने से जाम में जिनकी एंबुलैंस फंसी, कोरोना काल में जिन्होंने एंबुलैंस में अपने लोग खोए, पर आपने रास्ता नहीं खोला, क्या ये लोग आपके ऊपर फूल बरसाएंगे। (लोग आपको अपशब्द कहते हैं।)

याद रखिए, आपने जिन छोटे किसानों को बेवकूफ बनाकर अपने पास बैठा रखा था, आज वे आपके साथ नहीं हैं। उन्हें भी समझ आ गई है कि आपका पूरा आंदोलन राजनीतिक है। आपको ये बात समझ नहीं आई कि राजनीतिक लोग आपके कंधे पर रखकर बंदूकें चलाते रहे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है टिकैतजी का कोलकाता जाना। चुनाव के पहले एक पार्टी विशेष के खिलाफ प्रचार करना। उसके बाद भी वहां जाकर किसान आंदोलन तेज करने के लिए समर्थन मांगना। ये सब क्या दिखाता है? ये जो पब्लिक है, सब जानती है। और भी ऐसे उदाहरण हैं कि आपके नेता राजनैतिक दलों से मिले हुए हैं। आखिरकार अब वही बात हुई जो दैनिक सवेरा कहती रही। केंद्रीय कृषि मंत्री जो खुद भी किसान हैं, उन्होंने कह दिया है कि कानून रद्द नहीं होंगे, किसी संशोधन पर किसी भी समय बात हो सकती है। अब भी समय है। इसे बेकार मत जाने दीजिए। आपने अगर इन कानूनों के किन्हीं प्रावधानों पर बात करनी है, ठोस तथ्यों के आधार पर अगर संशोधन का कोई सुझाव देना है तो आप अपना दिल बड़ा करके और अहम छोड़कर सरकार के साथ कभी भी मेज पर बातचीत की ओर कदम बढ़ा सकते हैं। सरकार के दरवाजे हमेशा से खुले हुए हैं।

हरप्रीत सिंह, चार्टर्ड अकाऊंटैंट, कृषि विशेषज्ञ, अमृतसर

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