Lord Shiva

क्या आप जानते है भगवान शिव जी के मुंडमाला धारण करने के पीछे छुपे रहस्य के बारे में ?

भगवान शिव जी को भोलेनाथ के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है। माना जाता है भगवान शिव जी बहुत की जल्दी अपने भगतों की पूजा अर्चना से प्रसन्न हो जाते है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते है। भगवान शिव जी की हर तस्वीर में आपने देखना होगा के वह शरीर पर त्रिशूल, नाग, चन्द्रमा और मुंडमाला जैसी कई चीजों को धारण किया होता है। माना जाता है भगवान शिव जी जो कुछ भी अपने शरीर पर धारण करते थे उसके भी पीछे कोई न कोई रहस्य छुपा हुआ है। भगवान शिव जी हमेशा अपने गले में मुंडमाला धारण करते थे। तो आइए जानते है इसके पिछे के छुपे रहस्य के बारे में : 

भगवान भोलेनाथ के गले की मुंडमाला इस बात का प्रतीक है कि भगवान भोलेनाथ मृत्यु को भी अपने वश में किए हुए हैं. पुराणों के मुताबिक भगवान शिव के गले की यह मुंडमाला भगवान शिव और माता सती के प्रेम का प्रतीक भी है. ऐसी मान्यता हैं कि एक बार नारद मुनि के उकसाने पर माता सती ने भगवान भोलेनाथ से 108 शिरों वाली इस मुंडमाला के रहस्य के बारे में हठ करके पूछा था. भगवान भोलेनाथ के लाख मनाने पर भी जब माता सती नहीं मानी तब भोलेनाथ ने इसके रहस्य को माता सती से बताया था.

भोलेनाथ ने माता सती से बताया कि मुंडमाला के ये सभी 108 सिर आपके ही हैं. भोलेनाथ ने माता से कहा कि इससे पहले आप 107 बार जन्म लेकर अपना शरीर त्याग चुकी हैं और यह आपका 108वां जन्म है.

अपने बार-बार शरीर त्याग करने के बारे में जब माता सती ने भोलेनाथ से पूछा कि ऐसा क्या कारण है? कि केवल मैं ही शरीर का त्याग करती हूं आप नहीं. माता सती के इस सवाल पर भोलेनाथ ने उन्हें बताया कि मुझे अमरकथा का ज्ञान है इसलिए मुझे बार-बार शरीर का त्याग नहीं करना पड़ता. इस पर माता सती ने भी भगवान भोलेनाथ से अमरकथा सुनने की इच्छा प्रकट की. ऐसा माना जाता है कि जब भोलेनाथ माता सती को अमरकथा सुना रहे थे तो माता सती कथा के बीच में ही सो गईं और उन्हें अमरत्व की प्राप्ति नहीं हो पाई. इसका परिणाम यह हुआ कि माता सती को राजा दक्ष के यज्ञ कुंड में कूदकर आत्मदाह करना पड़ा.  

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