Supreme Court

अमेरिका में उच्चतम न्यायालय में प्रस्तावित सुधारों के बारे अध्ययन करेगी समिति

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने उच्चतम न्यायालय में आमूलचूल बदलाव की खातिर एक अध्ययन करने का आदेश दिया है और शुक्रवार को इसके लिए एक द्विदलीय आयोग का गठन किया जो अगले छह महीनों में अदालत का विस्तार करने संबंधी राजनीतिक रूप से विवादित मुद्दों को देखेगा। यह आयोग न्यायमूर्तियों के कार्यकाल समेत कई मुद्दों पर विचार करेगा।इस समीक्षा की शुरुआत करके बाइडन ने अपना वह चुनावी वादा पूरा किया जो कार्यकर्ताओं और डेमोक्रेट सदस्यों के दबाव में किया गया था। इन लोगों का कहना था कि उच्चतम न्यायालय का रूझान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान बहुत ही तेजी से दक्षिणपंथ की ओर हुआ है अत: इसे पुनर्गठित किया जाए।

दरअसल ट्रंप ने उच्च न्यायालय में तीन न्यायाधीशों की नियुक्ति की थी जिसके चलते उदार एवं रूढि़वादियों के बीच का संतुलन गड़बड़ा गया था।चुनाव अभियान के दौरान बाइडन अदालत के विस्तार संबंधी सवालों से बचते दिखे थे। सीनेट की न्यायिक समिति के पूर्व अध्यक्ष बाइडन ने कहा था कि न्यायिक नामांकन की प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही है। बहरहाल, उन्होंने यह कभी नहीं कहा था कि वह अदालतों में पद बढ़ाने का समर्थन करते हैं या नहीं अथवा जीवनपर्यंत नियुक्ति संबंधी वर्तमान प्रणाली में बदलाव करने के पक्ष में हैं या नहीं।

 सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैककॉनेल ने बाइडन के कदम की शुक्रवार को आलोचना की और कहा, ‘‘यह हमारे राष्ट्र की स्वतंत्र न्यायापालिका पर सीधा हमला है और बाइडन प्रशासन पर धुर वामपंथ के प्रभाव का एक और संकेत है।’’ इस 36 सदस्यीय आयोग में ज्यादातर लोग अकादमिक क्षेत्र के हैं। उन्हें 180 के भीतर प्रस्तावित बदलावों का अध्ययन करने, जन सभाएं करने और रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। समिति के अध्यक्ष बॉब बाउर है जो पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में व्हाइट हाउस के अधिवक्ता रह चुके हैं।

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