ITU Secretary General

चीन अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ में और अधिक नई प्रेरक शक्ति डालेगा : आईटीयू महासचिव

अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की स्थापना 1865 में हुआ। यह संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है जो सूचना और संचार प्रौद्योगिकी मामलों के लिए जिम्मेदार है। आम तौर पर हमारे मोबाइल फोन कॉल करना, इंटरनेट का इस्तेमाल करना, या ई-मेल भेजना आदि आईटीयू द्वारा किए गए कार्यों से अलग नहीं हो सकते।

आईटीयू के महासचिव चाओ हओलिन चीन से आते हैं। उन्होंने चाइना मीडिया ग्रुप को दिए एक इन्टरव्यू में कहा कि नए चीन ने आईटीयू में अपने कानूनी अधिकार को बहाल करने के बाद से लेकर अब तक दूरसंचार क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां प्राप्त की हैं और भविष्य में आईटीयू में ज्यादा नई प्रेरक शक्ति लगाएगा।

महासचिव चाओ हओलिन ने कहा कि सन् 1972 में आईटीयू में नए चीन का कानूनी स्थान बहाल हो गया, लंबे समय में चीन आईटीयू परिषद का सदस्य देश रहा है और आईटीयू के विभिन्न कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेता है। दोनों पक्षों के बीच करीब 50 सालों के सहयोग में चीन में दूरसंचार कार्य का जोरदार विकास हुआ और आईटीयू की गतिविधियों में भाग लेते हुए बड़ी कामयाबियां हासिल हुईं। 

इधर के सालों में चीन उच्च गुणवत्ता वाले आर्थिक सामाजिक विकास को लगातार बढ़ावा देता है। 5जी, बिग डेटा, कृत्रिम बुद्धि, सूचना प्रौद्योगिकी, एयरोस्पेस आदि क्षेत्रों में विश्व ध्यानाकर्षक उपलब्धियां प्राप्त कीं। इसके प्रति चाओ हओलिन बहुत खुश हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चीनी वैज्ञानिक अनुसंधान टीम में बहुत ज्यादा युवा विशेषज्ञ हैं, यह उत्साहपूर्ण बात है। उन्होंने चीन में तेज़ गति से विकसित उच्च तकनीक उपलब्धियों के प्रदर्शन पर बधाई दी और इसी क्षेत्र में चीनी समकक्षों के साथ सहयोग मजबूत करने की उम्मीद जताई।   

पिछले 50 वर्षों में चीन ने संयुक्त राष्ट्र के विकास में सकारात्मक योगदान दिया है। मानव जाति के साझे भाग्य वाले समुदाय की अवधारणा, और संयुक्त रुप से परामर्श, सह-निर्माण और साझा करने वाले सिद्धांतों को पेश किया, जिसने व्यवहार में आईटीयू के विकास को लगातार बढ़ावा दिया। महासचिव चाओ हओलिन के विचार में चीन द्वारा प्रस्तुत पहल ने वैश्विक डिजिटल आर्थिक विकास के लिए चीनी बुद्धि का योगदान दिया, जिसे संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सदस्य देशों के स्वागत और समर्थन होना चाहिए। “हम सभी की नियति एक ही है, इसलिए नियति का एक ही साझे समुदाय स्थापित करना हमारी आम सहमति होनी चाहिए।” उन्होंने यह बात कही।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र में अपनी वैध सीट की बहाली के बाद से लेकर अब तक पिछले 50 सालों में संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाओं में चीनी कर्मचारी सामने आते हैं। साल 2014 में चाओ हओलिन उच्च मतों से आईटीयू के महासचिव चुने गए, और इस संगठन के 150 साल पुराने इतिहास में पहले चीनी नागरिक महासचिव बने। साल 2018 में उच्च मतों से वे फिर एक बार आईटीयू महासचिव चुने गए। उन्होंने कहा कि भविष्य में आईटीयू के कार्यों में चीन और ज्यादा नई प्रेरक शक्ति लगाएगा और संगठन के विकास के लिए ज्यादा योगदान देगा।
( साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग )


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