foreign cooperation

ऊर्जा क्षेत्र में लगातार वैदेशिक सहयोग बढ़ा रहा है चीन

जलवायु परिवर्तन मानवता के समक्ष एक समान चुनौती है ।जीवाश्म ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की प्रमुखता वाली नयी सप्लाई व्यवस्था की स्थापना नाजुक बात बन चुकी है ।इधर के कुछ सालों में चीन मंच और तकनीक का लाभ उठाकर निरंतर स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में वैदेशिक सहयोग बढ़ा रहा है ।  सितंबर 2015 में चीन ने संयुक्त राष्ट्र विकास शिखर सम्मेलन पर वैश्विक ऊर्जा साइबर की स्थापना की अपील की, ताकि स्वच्छ व हरित तरीके से वैश्विक बिजली मांग पूरी की जा सके ।मार्च 2016 में चीन से प्रवर्तित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संगठन वैश्विक ऊर्जा पारस्परिक संपर्क ( इंटर कनेश्कन)विकास व सहयोग संगठन (जीईआईडीसीओ) पेइचिंग में स्थापित हुआ ।

इस संगठन के महासचिव वू श्वेन ने बताया कि पाँच साल के विकास से वैश्विक ऊर्जा साइबर चीनी प्रस्ताव से अंतरराष्ट्रीय मान्यता बन गयी है ।उन्होंने बताया ,अब संगठन के सदस्यों की संख्या 1,157 है ,जो 132 देशों व क्षेत्रों में फैले हैं ।जीईआईडीसीओ प्रारंभिक तौर पर वैश्विक प्रभाव संपन्न अंतरराष्ट्रीय संगठन बन चुका है ।पाँच साल में हमारे संगठन ने 200 से अधिक स्वच्छ ऊर्जा केंद्रों और 100 से अधिक देश व महाद्वीप पारीय कनेक्शन परियोजनाएं चुनकर एक बड़ा परियोजना भंडार स्थापित किया है ।इसके साथ उसने चीन और पड़ोसी देशों के बीच पारस्परिक संपर्क परियोजनाएं बढ़ायीं और अविकसित देशों में बड़ी परियोजना बढ़ाने में पूंजी व बाजार के अभाव जैसे सवाल का समाधान किया ।

चीन द्वारा स्थापित इस अंतरराष्ट्रीय मंच में चीन के पास संपूर्ण बौद्धिक संपदा अधिकार संपन्न अल्ट्रा हाई वोल्टेज ग्रिड तकनीक अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है ।जीईआईडीसीओ के प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के उप निदेशक हुआंग हान ने बताया कि अल्ट्रा हाई वोल्टेज ग्रिड ऊर्जा संसाधन के समायोजन को मजबूत करने और ऊर्जा सप्लाई की विश्वसनीयता और किफायत उन्नत करने के लिए बहुत उपयोगी है ।उन्होंने बताया ,अल्ट्र हाई वोल्टेज ग्रिड चीन का मौलिक आविष्कार है ,जो पूरे विश्व में प्रगतिशील है ।उसने लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में बिजली के वितरण की कठिनाई दूर की है ।वह विश्व में बिजली सप्लाई और वितरण में चोटी स्तर वाली प्रौद्योगिकी है ।इस तकनीक पर निर्भर होकर चीन ने इधर के दस साल में स्वच्छ ऊर्जा का तेज विकास पूरा किया ।अच्छी तकनीक के अलावा मापदंड ,साजो-सामान और इंजीनियरिंग क्षेत्र में भी चीन अग्रसर है ।ब्राजील में हमारी दो बिजली लाइन चालू हैं और भारत भी अल्ट्रा हाई वोल्टेज ग्रिट के निर्माण में सक्रिय  है ।

जीईआईडीसीओ के उप महासचिव छंग चीछ्यांग ने बताया कि भविष्य में संगठन चीन और पड़ोसी देशों के बीच बिजली के पारस्परिक जुड़ाव को आगे बढ़ाएगा, ताकि खुलेपन की स्थिति में चीन की ऊर्जा सुरक्षा पूरी की जाए ।उन्होंने बताया , चीन की प्रगतिशील तकनीक पर निर्भर रहकर हम इस मुद्दे पर विचार करेंगे कि रूस ,मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों की सौर ऊर्जा तथा पवन व पन बिजली चीन में पहुंचायी जाए ।इसके साथ दक्षिण एशिया और चीन के दक्षिण व पश्चिमी क्षेत्रों में बीच स्वच्छ ऊर्जा का सहयोग भी चलाया जाए ।हम चीन-जापान-दक्षिण कोरिया बिजली ग्रिड के जुड़ाव और दक्षिण एशिया के बिजली ग्रिडों के जुड़ाव को भी आगे बढ़ाएंगे ।यह चीन के कम कार्बन और हरित विकास के लिए मददगार होगा ।(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)   

  

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