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चीन और भारत के टीके दुनिया को बचाएंगे

कोरोना महामारी ने दुनिया पर अभूतपूर्व प्रभाव डाला है, लेकिन वायरस को हराने के लिए एक शक्तिशाली हथियार के रूप में कोरोना वैक्सीन ने पूरी दुनिया को आशा दी है। विशेष रूप से चीन और भारत द्वारा विकसित टीके, जिनकी उत्पादन क्षमता जगजाहिर है, न केवल अपने स्वयं के बाजारों की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं, बल्कि अन्य देशों को भी भेजे जा रहे हैं।

7 मार्च को, चीनी स्टेट काउंसिलर और विदेश मंत्री वांग यी ने जन प्रतिनिधि सभा की कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीन ने 10 से अधिक देशों के साथ वैक्सीन अनुसंधान और उत्पादन सहयोग किया है, और 60 से अधिक देशों में चीनी टीकों के उपयोग को अधिकृत किया है। चीनी टीकों की सुरक्षा और प्रभावशीलता को विभिन्न देशों द्वारा व्यापक मान्यता दी जा रही है। चीन 69 विकासशील देशों को मुफ्त में वैक्सीन सहायता प्रदान कर चुका है और साथ ही 43 देशों को टीके निर्यात कर रहा है। आशा है कि चीनी वैक्सीन महामारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई के लिए अधिक आत्मविश्वास और आशा लाएगी। अब चीन की साइनोवैक और साइनोफार्म आदि कंपनियों ने दुनिया को टीके प्रदान करना शुरू कर दिया है। चीन में उत्पादित टीकों का एशिया, मध्य पूर्व, अफ्रीका और लातिन अमेरिका के देशों को निर्यात शुरू किया गया है, और इनका अच्छा प्रभाव दिख रहा है।

उधर भारत में उत्पादित कोवीशील्ड / एस्ट्राजेनेका वैक्सीन भी बहुत लोकप्रिय है। भारत में इस वर्ष जनवरी से अगस्त के बीच तीस करोड़ नागरिकों को टीके लगाए जाने की योजना है। साथ ही भारत दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया, यूरोप और कनाडा आदि को वैक्सीन प्रदान कर रहा है। दुनिया में टीकों की कमी को देखते हुए भारतीय टीकों का महत्व जाहिर है। रिपोर्ट है कि भारत ने नेपाल, श्रीलंका और अन्य देशों को 6.8 मिलियन से अधिक खुराकें प्रदान की हैं, जो विश्व में सबसे अधिक है। इसके अलावा, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका को अधिक टीके प्रदान करेगा। भारत में उत्पादित कोरोना वैक्सीन बहरीन पहुंच चुकी है, और भारत मिस्र, अल्जीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत को भी टीके निर्यात करने की योजना बना रहा है।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने मीडिया से कहा कि संस्थान में वैक्सीन की 2 अरब खुराकों की वार्षिक उत्पादन क्षमता है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को दुनिया में सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता माना जाता है। संस्थान का 54 साल का इतिहास है और कर्मचारियों की संख्या सात हजार तक है। जनवरी 2021 से इस संस्थान में कोरोना वैक्सीन का मासिक उत्पादन लगभग पांच करोड़ खुराक रहा है। मार्च में इसकी उत्पादन क्षमता को दस करोड़ खुराक तक बढ़ाने की भी योजना है।

वहीं चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने जन प्रतिनिधि सभा की कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीन टीकों के सार्वजनिक टीका उत्पाद होने की विशेषता का समर्थन देता है। चीन वैश्विक सार्वजनिक उत्पाद के रूप में वैक्सीन अनुसंधान और विकास के लिए प्रतिबद्ध है, और विशेष रूप से विकासशील देशों में टीकों की पहुंच और इकॉनमिक्स में सुधार करने का प्रयास करेगा। वांग यी ने कहा कि वर्तमान में दुनिया भर के बाजार में कई टीके हैं, और कौन से टीके का चयन, प्रत्येक देश द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाना चाहिए। चाहे वह चीनी टीका हो या विदेशी टीका, जब तक यह सुरक्षित और विश्वसनीय है, यह एक अच्छा टीका है। हम वैक्सीन सहयोग के राजनीतिकरण का विरोध करते हैं।
 
विश्व में प्रमुख वैक्सीन उत्पादक देश के रूप में चीन और भारत द्वारा उत्पादित टीके परस्पर अनन्य नहीं हैं, बल्कि इस तथ्य को भी दर्शाते हैं कि दोनों देश महामारी के खिलाफ लड़ाई में एक ही मोर्चे में खड़े हैं। यदि दोनों देश टीके के साथ दुनिया को बचाने के लिए सहयोग कर काम करते हैं, तो यह दुनिया भर के देशों को जल्द से जल्द महामारी के कारण होने वाली आपदा से छुटकारा पाने में भी मदद करेगा, और दुनिया के आर्थिक विकास और सामाजिक व्यवस्था को फिर से बहाल करेगा।  
साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)




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