Chaitra Navratri

Chaitra Navratri: इस मंदिर में पूरी होती है श्रध्दालुओ की मनोकामना, जानिए इससे जुड़ा इतिहास

नवरात्र के पावन मौके पर हम आपको पंचकूला के मशहूर माता मनसा देवी मंदिर का इतिहास बताने जा रहे है जो अपने आप में बेहद खास है। माता मनसा देवी मंदिर में चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रों में मेला लगता है। जिसके चलते यहां लाखों की तादाद में श्रध्दालु आते हैं। यहां लोग माता से अपनी मनोकामना को पुरा करने के लिए आशिर्वाद लेते हैं। माना जाता है कि माता मनसा देवी से मांगी गई हर मुराद माता पूरी करती है। 

कहा जाता है कि जिस जगह पर आज मां मनसा देवी का मंदिर है, यहां पर सती माता के मस्तक का आगे का हिस्सा गिरा था। मनसा देवी का मंदिर पहले मां सती के मंदिर के नाम से जाना जाता था। मान्यता है कि मनीमाजरा के राजा गोपालदास ने अपने किले से मंदिर तक एक गुफा बनाई हुई थी, जो लगभग 3 किलोमीटर लंबी है। वे रोज इसी गुफा से मां सती के दर्शन के लिए अपनी रानी के साथ जाते थे। जब तक राजा दर्शन नहीं करते थे, तब तक मंदिर के कपाट नहीं खुलते थे।

मुख्य मदिंर में माता की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति के आगे तीन पिंडियां हैं, जिन्हें मां का रूप ही माना जाता है। ये तीनों पिंडियां महालक्ष्मी, मनसा देवी तथा सरस्वती देवी के नाम से जानी जाती हैं। मंदिर की परिक्रमा पर गणेश, हनुमान, द्वारपाल, वैष्णवी देवी, भैरव की मूर्तियां एवं शिवलिंग स्थापित है।

आज मां शैलपुत्री की पूजा हो रही है लेकिन इस दौरान श्रद्धालुओं को कोरोना की गाइडलाइन का खास ध्यान रखना होगा। मंदिरों में बिना मास्क के देवी के दर्शन भी नहीं होंगे। वहीं मूर्तियों को छूने पर पाबंदी रहेगी। श्रद्धालुओं को दूर से ही देवी के दर्शन करने होंगे। नवरात्रों के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। 

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