Chaitra Navratri

Chaitra Navratri: जानिए नवरात्रि के महत्व और व्रत कथा के बारे में खास

व्रत-उपवास का महत्व
शास्त्रों के अनुसार नवरात्र उपासना का पर्व माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इन दिनों व्रत-उपवास रखने से आध्यात्मिक सुख-शांति मिलती है। दुर्गा मां के अवतार की कथा भी इससे जुड़ी है। कथा के अनुसार असुरों से पीड़ित देवता जब प्रजापति ब्रह्मा के पास आते हैं तो शक्ति सम्पन्न होते हुए भी हारने का कारण पूछते हैं। तब ब्रह्मा जी ने व्रत-उपवास की सार्थकता बताते हुए कहा कि संगठन व पराक्रम के अभाव से अन्य गुण निष्प्राण हो जाते हैं। व्रत-उपवास में सिमरण आदि करने का भी विधान है। 

नवरात्र व्रत कथा
एक समय देवी भक्त ब्राह्मण पीठल नगर में रहता था। उस ब्राह्मण की सुमति नामक कन्या थी जो मां भगवती में अपार आस्था रखती थी। एक दिन वह सहेलियों के साथ खेल में तल्लीन होने के कारण पिता जी के पास दुर्गा पूजा में उपस्थित न हो सकी। पुत्री की लापरवाही से क्रोधित पिता ने कहा कि वह उसका विवाह किसी दरिद्र एवं कुष्ठ रोगी से करेगा। पुत्री बोली कि मैं आपके आश्रय में हूं, आप मेरी लापरवाही की जो चाहे सजा दे दें, मेरे भाग्य में जो होगा वह मिल जाएगा। 

अब तो ब्राह्मण और भी कठोर हो गया तथा अपने वचनों के अनुसार उसने कन्या का विवाह कुष्ठ रोगी से ही कर दिया। पुत्री दु:खी हुई पर इसे उसने अपना भाग्य माना तथा पति के संग विदा हो गई। इतना होते हुए भी उस कन्या की मां दुर्गा के प्रति आस्था कम न हुई एवं उसने मां दुर्गा का पूजन जारी रखा। उसके पूर्व सद्कर्मों के कारण मां दुर्गा ने उसे दर्शन दिए एवं उसे वर मांगने को कहा।  मां दुर्गा ने उसे पूर्व जन्म का वृतांत भी सुनाया कि कैसे वह उस जन्म में एक भील की पत्नी थी। पति द्वारा चोरी किए जाने के अपराध में उन दोनों को बंदी गृह में डाल दिया गया एवं भोजन तक न दिया गया। उन दिनों नवरात्र काल था। 

अत: अन्न-जल ग्रहण न करने से उस द्वारा नवरात्र व्रत का पालन हो गया। तब मां ने उपस्थित होकर कहा कि वह उससे प्रसन्न हैं और कोई भी वर मांगने को कहा। उस देवी ने मां दुर्गा को बारम्बार प्रणाम किया एवं उसके तथा उसके पति के समस्त अपराधों को क्षमा करने की बात कही। तब मां दुर्गा के तथास्तु कहने पर पति कांतिवान काया का हो गया। मां दुर्गा को अरोग्य दायिनी, दुर्गति नाशिनी एवं संताप हारिणी कहते हुए ब्राह्मणी ने मां की बार-बार जय-जयकार की। मां दुर्गा ने उसे जितेन्द्रिय, धर्मात्मा, कीर्तिवान व वैभवशाली पुत्र का भी वरदान दिया। तब सुमति बोली- हे मां दयामयी, कृपया मुझे नवरात्र व्रत की पूर्ण विधि बताइए जिसके रखने से आप प्रसन्न होती हैं। तब माता ने कहा कि मैं व्रत का विधि-विधान बताती हूं जिसके सुनने मात्र से सम्पूर्ण पापों का नाश होता है

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