Chaitra Navratri

Chaitra Navratri: 90 साल बाद बन रहा है शुभ संयोग, कलश स्थापना के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

आज से  चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ हो चूका है। हिन्दू धर्म से इसे बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। आपको बता दे के चैत्र नवरात्रि 21अप्रैल तक रहेगा। नवरात्रि के इन नौ दिनों में व्रत रख कर  मां दुर्गा जी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा की उपासना करने से भक्त की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। वैसे तो नवरात्रि के सभी दिनों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन इसका पहला दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन माता रानी की पूजा के लिए कलश की स्थापना की जाती है। इस बार 90 साल बाद शुभ संयोग बनने से चैत्र नवरात्रि के पहले दिन का महत्व और बढ़ गया है। 

नवसंवत्सर के प्रथम दिन 13 अप्रैल मंगलवार को सुबह 2.00  बजकर 32 मिनट पर ग्रहों के राजा सूर्य का मेष राशि में गोचर हो रहा है. इसके साथ ही संवत्सर प्रतिपदा और विषुवत संक्रांति दोनों एक ही दिन 31 गते चैत्र, 13 अप्रैल को हो रही है. ज्योतिषाचार्यों का मत है कि यह स्थिति अर्थात शुभ संयोग करीब 90 साल बाद बन रही है.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-
दिन एवं दिनांक- मंगलवार, 13 अप्रैल 2021
शुभ मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक.
अवधि- 04 घंटे 15 मिनट
कलश स्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक
नवरात्रि कलश स्थापना की सरल विधि

भक्त सबसे पहले मिट्टी के चौड़े मुंह वाले बर्तन को रखें और उसमें सप्तधान्य बोएं. उसके बाद कलश में जल भरें, तथा ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें. कलश के मुख में आम या अशोक का पल्लव रखें. अब नारियल में कलावा लपेटें तथा उस नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पत्तों के मध्य रखें. अब मां दुर्गा का आह्वान करें.




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