America must first take concrete

अमेरिका को टीके की राहत में पहले ठोस कदम उठाना चाहिए

अब उच्च आय वाले देशों में विश्व के लगभग 44 प्रतिशत टीके लगाये गये हैं जबकि कम आय वाले देशों में सिर्फ 0.4 प्रतिशत टीके लगाये गये। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेद्रोस अधनोम घब्रेयेसस ने 7 जून को एक न्यूज ब्रीफिंग में यह खबर दी। उन्होंने कहा कि कुछ देशों ने टीके साझा करने का वादा किया है। आशा है कि वे जल्दी से अपने वादे को लागू करेंगे ।
 
ध्यान रहे अमेरिकी सरकार ने हाल ही में वादा किया था कि इस जून के अंत से पहले 8 करोड़ टीकों का वहन विदेशों में किया जाएगा लेकिन अब तक अमेरिका ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। क्या यह फिर राजनीतिक प्रर्दशन है। ऐसा संदेह होना स्वाभाविक है ।
 
कई विश्लेषकों का विचार है कि अमेरिका ने अपनी छवि सुधारने और चीन पर प्रहार करने के लिए तथाकथित वैक्सीन राहत योजना प्रस्तुत की। लेकिन 8 करोड़ वैक्सीन का विदेशों में वहन करना लॉजिस्टिक्स, निगरानी और कूटनीति में मौजूद कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। तिथि तय करना कठिन है।
 
उधर चीन ने 80 से अधिक जरूरतमंद विकासशील देशों को वैक्सीन की सहायता प्रदान की है और 40 से अधिक देशों को वैक्सीन निर्यात किये हैं और विश्व के लिए कुल 35 करोड़ वैक्सीन प्रदान किये हैं। क्या अमेरिका वैक्सीन राहत में चीन की तरह ठोस कदम उठाएगा। राजनीतिक प्रदर्शन के बजाये विश्व को अमेरिका की कार्रवाई की जरूरत है।
 
(साभार-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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