Xinjiang

अमेरिका को शिनच्यांग पर गुण-दोष का बखान करने की पात्रता नहीं

अमेरिकी नेता ने हाल ही में फिर एक भाषण में शिनच्यांग में तथाकथित मजबूर श्रम होने का आरोप लगाया और चीन की शिनच्यांग की नीतियों पर कीचड़ उछाला । लेकिन बार-बार मानवाधिकार मुद्दे को लेकर चीन पर आरोप लगाने से अमेरिका विश्व में तथाकथित नैतिक नेता की छवि स्थापित नहीं कर सकता ,इसके विपरीत मानवाधिकार सवाल पर उसके पाखंड और दोहरे मापदंड का पर्दाफाश हुआ है ।

ध्यान रहे कि एक अरसे से अमेरिका ने किसी ठोस प्रमाण के बिना जबरन श्रम और जातीय नरसंहार जैसे सफेद झूठ गढ़े ।वह शिनच्यांग के मानवाधिकार पर निराधार आरोप लगाता रहा है और अपने मित्र देशों के साथ चीन पर दबाव डालता रहा ।

वास्तव में अमेरिका ही श्रमिकों खासकर अल्पसंख्यकों के मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन करने और जबरन श्रम मौजूद होने वाला देश है ।वह न सिर्फ घरेलू मानवाधिकार सवाल की उपेक्षा करता है ,बल्कि निरंतर विदेशों में मानवाधिकार की आपदा रचता है ।उदाहरण के लिए अप्रैल 2021 तक अफगानिस्तान युद्ध में 2 लाख 40 हजार लोग मारे गये ,जिनमें 47 हजार बेगुनाह अफगान नागरिक शामिल थे। 

शिनच्यांग को बदनाम करने से अमेरिका के सवाल का समाधान नहीं किया जा सकता और शिनच्यांग की समृद्धि व स्थिरता की स्थिति नहीं बदली जा सकती ।इधर के कुछ सालों में चीन सरकार के प्रभावी आंतकवाद विरोधी कदमों से शिनच्यांग में लगातार 4 साल से कोई हिंसक आंतकी घटना नहीं हुई है ,जिसने तेज आर्थिक विकास के लिए मजबूत नींव डाली है ।
(साभार,चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)


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