Vastu Shastra

वास्तु शास्त्र के अनुसार अपने घर में कभी भी इस स्थान पर ना बनाए शौचालय

वास्तु शास्त्र हमारे जीवन में बहुत अधिक महत्व रखता है। माना जाता है के अगर हमारे घर की कोई भी वस्तु वास्तु शास्त्र के विपरीत हो तो जीवन में हमे बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते है के वास्तु शास्त्र के अनुसार हमारी शर की एक दिशा में राहु का निवास होता है। अगर वह स्थान गन्दा हो तो राहु निराश हो जाते है। जिस कारन हमे बहुत मुश्किलें आती है। घर का टॉयलेट या शौचालय यदि टूटा-फूटा है, गंदा है, बदरंग है या खराब है तो इससे राहु का नकारात्मक प्रभाव घर पर पड़ता है. जिसके कारण घर में रोग-दोष, दुःख और शोक का जन्म होता है. इस लिए राहु के कुप्रभाव से बचने के लिए शौचालय को हमेशा साफ व स्वच्छ रखना चाहिए.

- शौचालय कभी भी ईशान कोण पर नहीं बनाना चाहिए. यदि यह गलती से भी इस दिशा में बन गया है तो भी यह बहुत ही धनहानि और अशांति का कारण बनेगा. शौचालय में बैठने की व्यवस्था यदि दक्षिण या पश्चिम मुखी है तो उचित होगा.
- राहु के अशुभ फल से बचने के लिए शौचालय को स्वच्छ, साफ, सुन्दर और सूखा रखना चाहिए. इसमें सुगन्धित वातावरण रखना चाहिए. इससे राहु का दोष नहीं होगा. राहु के दोष से बचने के लिए शौचालय के किसी कोने में कर्पूर का एक टुकड़ा या खड़ा नमक को एक कांच के कटोरे में रख दें.
- राहु का दूसरा स्थान सीढियों पर होता है. सीढियां यदि टूटी फूटी है या गंदगी से युक्त है. तो राहु सक्रिय हो जाते हैं और यह जीवन में उथल-पुथल मचा देते हैं. इससे शत्रु सक्रिय हो जाते हैं और व्यक्ति कर्ज में डूब जाता है.
- घर में सीढियों को पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण दिशा में बनवानी चाहिए. कभी भी उत्तर-पूर्व में सीढियां नहीं बनवानी चाहिए. यदि किसी कारण वश सीढियां गलत दिशा में बन गई है तो इसे हमेशा साफ़-सुथरा रखना चाहिए.  

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