Lal Kitab

लाल किताब के अनुसार जानिए क्यों नहीं करते पीड़ित ग्रहों का उपाय

बहुत से लोगो की कुंडली में ग्रह दोष होते है। लेकिन इन ग्रहो का उपाए भी होता है ताकि दोषों का उपाए कर सके और जीवन सरल हो सके। लेकिन क्या आप जानते है के कुछ ग्रह ऐसे होते है जिनका उपाए नहीं किया जा सकता। तो आइए जानते है इससे जुड़ी जुच खास जानकारी। 

जैसे मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है। उसी तरह लाल किताब के अनुसार पहले भाव के लिए मंगल, दूसरे भाव के लिए चन्द्रमा, तीसरे भाव के लिए बुध, चौथे भाव के लिए चन्द्रमा, पांचवें भाव के लिए सूर्य, छठे भाव के लिए राहु, सातवें भाव के लिए शुक्र, आठवें भाव के लिए चन्द्रमा, नवें भाव के लिए गुरु, दसवें भाव के लिए शनि, ग्यारहवें भाव के लिए गुरु और बारहवें भाव के लिए केतु की पूजा पाठ और उपचार आदि करने चाहिए।

जैसे गुरु दसवें भाव में नीच का हो रहा है तो शनि का उपाय करना होगा। दूसरा यह कि अपने घर से पूजाघर हटा देना चाहिए। इसी प्रकार अन्य भावों पर यह नियम लागू होता है। मतलब यह कि यदि गुरु महोदय शनि के घर में बैठे हैं तो उनको शनि ही ठीक कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए और भी तरीके के उपाय करना होते हैं, क्योंकि कुंडली में यह भी देखा होगा कि कौनसा ग्रह किधर देख रहा है और उसकी दसवें भाव पर कैसी दृष्टि है। क्योंकि यदि गुरु का साथी ग्रह गुरु की मदद कर रहा है तो फिर उपचार बदल जाएगा। तो यह थी ग्रहों और भावों के उपचार के नियम।

उपचार का अर्थ यहां उपाय से। कुछ लोग इसे टोटके कहते हैं जो कि गलत है। हालांकि यहां यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि टोने किसी बुरे कार्य या स्वार्थ की पूर्ति हेतु होते हैं जिनका तंत्र से संबंध होता है और टोटके किसी अच्छे कार्य या ग्रहों के उपचार होतु होते हैं। यहां प्रचलन से लाल किताब के टोटके कहा जाने लगा है जिसमें ग्रहों के उपचार के बारे में ही जानकारी होती है और किसी अन्य के बारे में नहीं। इसी तरह कोई ग्रह यदि सोया हो तो उसे जगाना होता है। 

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