Lal Kitab

लाल किताब के अनुसार जानिए किस तरह बनाई जाती है कुंडली और इसका महत्व

शास्त्रों के अनुसार कुंडली को बाउट अधिक महत्व दिया जाता है। शादी के समय कुंडलियों को मिलाया जाता है ताकि पति पत्नी का साथ हमेशा बना रहे। कुंडली बहुत ही महत्वपुर्ण होती है। लाल किताब में कुंडली में स्थित राशियों को नहीं माना जाता है। केवल भावों को ही माना जाता है। प्रत्येक व्यक्ति की हॉरोस्कोप मेष लग्न की ही होती है। बस फर्क होता है तो सिर्फ ग्रहों का। फिर कारकों को और स्वामी ग्रहों को अपने अनुसार बनाकर लिख लेते हैं।

1.पहले भाव का स्वामी ग्रह मंगल होता है जिसका कारक ग्रह सूर्य है।
2.दूसरे भाव का स्वामी ग्रह शुक्र होता है जिसका कारक ग्रह गुरु है।
3.तीसरे भाव का स्वामी ग्रह बुध होता है जिसका कारक ग्रह मंगल है।
4.चौथे भाव का स्वामी ग्रह चंद्र होता है जिसका कारक ग्रह भी चंद्र ही है।
5.पाचवें भाव का स्वामी ग्रह सूर्य होता है जिसका कारक ग्रह गुरु है।
6.छठे भाव का स्वामी ग्रह बुध होता है जिसका कारक ग्रह केतु है।
7.सातवें का स्वामी शुक्र होता है जिसका कारक ग्रह शुक्र और बुध दोनों हैं।
8.आठवें भाव का स्वामी ग्रह मंगल होता है जिसका कारक ग्रह शनि, मंगल और चंद्र हैं।
9.नवें भाव का स्वामी ग्रह गुरु होता है जिसका कारक ग्रह भी गुरु होता है।
10.दसवें भाव का स्वामी ग्रह शनि होता है और कारक भी शनि है।
11.ग्यारहवें भाव का स्वामी शनि होता है, लेकिन कारक गुरु है।
12.बारहवें भाव का स्वामी गुरु होता है, लेकिन कारक राहु है।

Live TV

Breaking News


Loading ...