AP in UP Png-run brick-kilns

UP में A.P. नियंत्रण के लिए लगेंगे PNG से चलने वाले ईंट-भट्ठे, पुराने ईंट-भट्ठे को बंद करने की तैयारी

उत्तर प्रदेश : वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है। हर साल ही हवा में प्रदूषण का जहर घुल जाता है, जिसके लिए अभी तक पराली जलाने से लेकर सड़कों पर दौड़ते वाहनों से निकलने वाला धुआं भी जिम्‍मेदार रहा है। हालांकि अब वायु प्रदूषण को बढ़ाने में ईंट-भट्ठों की भागीदारी को देखते हुए परंपरागत ईंट-भट्टा उद्योग को बंद करने के साथ ही नई तकनीक को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। सी.पी.सी.बी. के वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार को भी पी.एन.जी. से चलने वाले भट्टों को लेकर चिठ्ठी भेजी गई है। सी.पी.सी.बी. प्रदूषण नियंत्रण की प्रमुख और केंद्रीय एजेंसी है, ऐसे में सी.पी.सी.बी. की निगरानी में नई तरह के ईंट-भट्टे लगेंगे। चूंकि पी.एन.जी. पाइपलाइन बेस्‍ड ईंधन है, जिसके लिए काफी बड़े स्‍तर पर इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर की जरूरत होती है। इसके साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि पी.एन.जी. की सप्‍लाई किन-किन इलाकों में है और क्‍या वहां पर नए ईंट-भट्टे खोले जा सकते हैं या नहीं। लिहाजा उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा गया है कि नई तकनीक के भट्टों के लिए क्‍या-क्‍या सुविधाएं हैं। अगर नहीं हैं तो फेज बनाकर किस तरह इसे विकसित किया जा सकता है।

एन.जी.टी. में दायर की गई एक याचिका में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश के बागपत में करीब 600 ईंट भट्ठों का संचालन पर्यावरण हितों और कानून की अनदेखी कर किया जा रहा है। इसके साथ ही मथुरा में चल रहे करीब 500 ईंट-भट्टों में से आधे से ज्‍यादा के अवैध होने की बात कही गई थी। हालांकि एन.जी.टी. ने 12 अगस्‍त के आदेश में मथुरा के लिए नई कमेटी बना दी है जो अब मथुरा में चल रहे ईंट-भट्टों और यहां की आबोहवा को लेकर अपनी रिपोर्ट एन.जी.टी. को देगी। इसके अलावा प्रदेश के गाजियाबाद, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, हापुर, मुजफ्फरनगर सहित 7 जिलों के अलावा हरियाणा और राजस्थान अलवर और भरतपुर में भी भट्टों के द्वारा प्रदूषण फैलाने की बात कही गई थी।

दिल्‍ली-एन.सी.आर. सहित उत्‍तर प्रदेश में अब कोयला से चलने वाले ईंट-भट्ठों के बजाए पी.एन.जी. यानी पाइप्‍ड नेचुरल गैस से चलने वाले ईंट-भट्ठे लगाने के सुझाव दिए गए हैं। हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के प्रमुख जस्टिस एके गोयल की अगुआई वाली पीठ की ओर से कहा गया कि ईंट-भट्ठा उद्योगों का दिल्ली-एन.सी.आर. की आबोहवा में सर्दियों और गर्मियों के दौरान पीएम-10 उत्सर्जन में लगभग 5 से 7 फीसदी का योगदान रहता है। लिहाजा प्रदूषण फैलाने वाले ईंट-भट्टों की जगह अब पी.एन.जी. से चलाए जाने वाले नए भट्टे लगाए जाएं।

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